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Hindi Poem ( हिंदी कविता ) | ये शाम हर रोज आती है | ye shaam har roj aati hai

सारे पंछी अपने घरोमे वापस लौट रहे होते है , मुसाफिर अपना डेरा डालने की तैयारी में जुटे होते है , बच्चे खेलने में दंग होते है ,सारी दुनिया को रोशन करनेवाला सूरज अस्त हो रहा होता है और उसी  सूरज की गरमाहट से बचाने को ये शाम हर रोज आती है | 


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कभी धुप से बचाती हुई,
कभी बारिश में भीगती हुई,
ठंड को  गोद लिए,
ये शाम हर रोज आती है |

किरन सुनहरे  लाती हुई,
दिलो को मिलाती हुई,
एक सुहाना माहौल लिए,
ये शाम हर रोज आती है |

कही मुस्काने खिलाती हुई,
कही आस्था को जगाती हुई,
पंछीयोंको घर बुलाये,
ये शाम हर रोज आती है |

चाँद को सवारती हुई,
हर शिकन को मिटाती हुई,
रात की आहट लिए,
ये शाम हर रोज आती है |
ये शाम........ 


- मानस 

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